बरिस्ता..
गहरी काली रातों की लिखा-पढ़ी....म्यूज़िक और पसंदीदा ब्लैक टी..
Wednesday, 2 May 2012
Thursday, 26 April 2012
Tuesday, 3 April 2012
तेरी आवाज़ के साए तेरे होंठों के सराब
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| इक़बाल बानो |
दश्त ए तन्हाई में ऐ जाने जहां लरज़ा है
तेरी आवाज़ के साए तेरे होंठों के सराब
दश्त ए तन्हाई में दूरी के ख़सो - खाक़ तले
खिल रहे हैं तेरे पहलू के समन और गुलाब
उठ रही है कहीं क़ुरबत से तेरी सांस की आंच
अपनी ख़ुशबू में सुलगती हुयी मद्धम मद्धम
दूर उफ़क़ पार चमकती हुयी कतरा कतरा
गिर रही है तेरी दिलदार नज़र की शबनम
इस क़दर प्यार से ऐ जाने जहां रक्खा है
दिल के रुखसार पे इस वक़्त तेरी याद ने हाथ
यूँ गुमां होता है गरचे हैं अभी सुबह ए फ़िराक
ढल गया हिज्र का दिन आ भी गयी वस्ल की रात
दश्त एक तन्हाई में ऐ जाने जहां लरज़ा है
तेरी आवाज़ के साए तेरे होंठों के सराब
Tuesday, 20 March 2012
Saturday, 10 March 2012
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